गलत दिशा में जा रहे मुख्यमंत्री मोहन यादव

Updated on 08-06-2024
सही कहा है राजा की कुर्सी होती ही ऐसी है कि इस पर बैठने वाले कि बुद्धि कुंद संकुचित हो जाती है फिर मंत्री गण अपने षड्यंत्र में सफल होते है गलत सलाह देकर ऐसा ही कुछ मप्र की सरकार के राजा बने मोहन यादव के साथ हो रहा है।पिछले 5 महिनों में एक भी कोई ऐसी उपलब्धि नहीं है जिससे यह कहा जाए कि मुख्यमंत्री अपने विवेक से चल रहे हों हर फैसले को किसी न किसी स्वार्थी सलाहकारों की छवि झलकती है।हाल ही में एक समिति बनाई आगामी उज्जैन सिंहस्थ को लेकर इस समिति में कुछ ऐसे मंत्री गण शामिल किए गए जिनके ऊपर भृस्ताचार के आरोप लगते रहे एक समय खुद मुख्यमंत्री पर भी आरोप लगे थे पिछले सिंहस्थ के समय इससे एक जनचर्चा का विषय बना है कि धार्मिक आस्था से जुड़े कुम्भ की व्यवस्था के लिए सॉफ् स्वच्छ छवि के मंत्री या प्रदेश में कई हस्तियां है जिन्हें समिति में शामिल करना चाहिए।जब पहले से आरोपों में घिरे मंत्री अधिकारी सिंघनस्थ की जिम्मेदारी सम्भालेनगे तो एक बार फिर मप्र चर्चित होगा किसी बड़े घोटाले को जन्म देकर।
ताज्जुब इस बात का है कि केंद्रीय नेतृत्व आखिर चुप होकर क्यों बेठ गया यदि प्रदेश पर ध्यान नहीं देगा तो बेलगाम हो जाएगा शासन फिर वही हाल होगा अंगले चुनाव तक क्योंकि विपक्ष मजबूत हो गया अब धीरे धीरे मप्र में भी अपनी रणनीति बनाएगा इसमें कोई दो मत नहीं।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें