प्राइवेट में सरकारी अस्‍पताल से 8 गुना महंगे इलाज का पूरा कैलकुलेशन समझिए

Updated on 13-08-2026
नई दिल्‍ली: प्राइवेट और सरकारी हेल्थकेयर के खर्च में बहुत ज्‍यादा फर्क है। लोकल सर्किल्‍स के एक नए सर्वे के नतीजों से इसका पता चलता है। इसके मुताबिक, प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती होने का औसत खर्च सरकारी के मुकाबले लगभग आठ गुना ज्‍यादा है। यह सर्वे हेल्थकेयर के खर्च और इलाज कराने वाले परिवारों पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच आया है।

सर्वे में नेशनल सैंपल सर्वे (जनवरी-दिसंबर 2025) के 80वें राउंड के डेटा का हवाला दिया गया। इससे पता चला कि प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती होने का औसत खर्च 50,508 रुपये था। वहीं, सरकारी हॉस्पिटल में यह 6,631 रुपये था। इसका मतलब है कि प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती होने का औसत खर्च सरकारी सुविधा के मुकाबले लगभग 7.6 गुना था।
यह अंतर बच्चे के जन्म से जुड़े खर्चों में भी दिखा। प्राइवेट हॉस्पिटल में बच्चे के जन्म के लिए औसत 'आउट-ऑफ-पॉकेट' खर्च (अपनी जेब से किया गया खर्च) 37,630 रुपये था। वहीं, सरकारी सुविधा में यह सिर्फ 2,299 रुपये था।

यह है बड़ी चिंता का विषय


सर्वे का मकसद उन परिवारों के अनुभवों को समझना था जिन्होंने पिछले तीन सालों में प्राइवेट हॉस्पिटल की सेवाओं का इस्तेमाल किया था। इसमें भारत के 306 जिलों के नागरिकों से 23,084 जवाब मिले।

नतीजों से पता चला कि ज्‍यादा खर्च परिवारों के लिए एक बड़ी चिंता थी। 68% लोगों ने कहा कि उन्हें इलाज के लिए बहुत ज्‍यादा कीमतें चुकानी पड़ीं। यह सर्वे में सबसे ज्‍यादा बताई गई समस्या थी। वहीं, 63% लोगों ने डायग्नोस्टिक टेस्ट के लिए बहुत ज्‍यादा कीमतें होने की बात कही।

सुविधाओं के लिए ज्यादा चार्ज

  • सुविधाओं के लिए ज्‍यादा चार्ज भी एक और चिंता का विषय था।
  • 56% लोगों ने ICU या कमरों जैसी सुविधाओं के लिए बहुत ज्‍यादा चार्ज का जिक्र किया।
  • साथ ही, 51% लोगों ने दवाओं और इस्तेमाल होने वाली चीजों (कंज्यूमेबल्स) के लिए बहुत ज्‍यादा कीमतें होने की बात कही।

बिलिंंग के तरीकों को लेकर भी चिंंता


सर्वे में बिलिंग के तरीकों से जुड़ी चिंताओं पर भी रोशनी डाली गई। 49% लोगों ने कहा कि उनके बिल में डॉक्टर से सलाह लेने के गैर-जरूरी चार्ज शामिल किए गए थे। जबकि 43% ने डॉक्टर की सलाह के लिए बहुत ज्‍यादा चार्ज होने की बात कही।
इसके अलावा, 40% लोगों ने दवाओं और इस्तेमाल होने वाली चीजों की मात्रा के लिए ओवरबिलिंग की शिकायत की। जबकि 40% ने कहा कि उन्हें अचानक या अनजान चार्ज का सामना करना पड़ा।

टेस्ट के ज्यादा खर्च की भी समस्या

कुल मिलाकर, सर्वे में शामिल 10 में से छह से ज्‍यादा परिवारों ने कहा कि उन्हें प्राइवेट हॉस्पिटल के बिलों को लेकर समस्याओं का सामना करना पड़ा। इनमें से ज्‍यादातर लोगों ने खास तौर पर इलाज और टेस्ट के ज्‍यादा खर्च का जिक्र किया। सिर्फ 14% लोगों ने कहा कि उन्हें बताई गई बिलिंग समस्याओं में से किसी का भी सामना नहीं करना पड़ा।
इसलिए, सर्वे के नतीजे प्राइवेट हेल्थकेयर से जुड़े आर्थिक दबाव को उजागर करते हैं। खासकर तब जब मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने, डायग्नोस्टिक टेस्ट, ICU या कमरे की सुविधाओं, दवाओं और अन्य सेवाओं की जरूरत होती है।

सर्वे में इन लोगों को किया गया शामिल

यह सर्वे वेरिफाइड यूजर्स के बीच किया गया था। इसमें 69% पुरुष और 31% महिलाएं शामिल थीं। सर्वे में शामिल लोगों में से 46% टियर-1 लोकेशन से, 30% टियर-2 शहरों से और 24% टियर-3, टियर-4 और टियर-5 जिलों से थे।

इसके नतीजे मरीजों के अनुभवों और बिलिंग से जुड़ी समस्याओं की एक झलक दिखाते हैं। वहीं, सर्वे में बताए गए NSS के आंकड़े प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों के बीच हेल्थकेयर पर होने वाले औसत खर्च में भारी अंतर को दर्शाते हैं।

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