टैक्स हटाने की घोषणा से ही नहीं सुधरेगा मार्केट, सरकार को रोजगार के नए अवसर बनाने होंगे
Updated on
16-10-2026
विजय केडियावित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले दिनों एक कार्यक्रम में कहा था कि सरकार बजट से पहले होने वाली चर्चाओं में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स हटाने पर सुझाव सुनना चाहेगी। हालांकि, उन्होंने यह पक्का नहीं किया कि यह टैक्स हटाया जाएगा या इसकी दर कम की जाएगी। आज देसी और विदेशी, दोनों निवेशक LTCG टैक्स पर मुखर हैं। लेकिन, मेरे ख्याल से वित्त मंत्री की बात सही है।कम नहीं होगी दर
सरकार ने इससे पहले अस्थायी तौर पर शेयर बाजार में वायदा कारोबार पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) लगाया था, लेकिन वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में STT की दर 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दी गई। बाजार की अभी जो स्थिति है उसमें लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन का सवाल ही नहीं है, क्योंकि ज्यादातर निवेशकों के लिए मुनाफा कमाना मुश्किल हो रहा है। हर जगह ज्यादातर घाटा है। फिलहाल, मुझे ऐसा नहीं लग रहा है कि LTCG कम होने वाला है। मेरे ख्याल से सरकार STT हटाने पर विचार कर सकती है या कर की दर थोड़ी कम कर सकती है।अर्थव्यवस्था सुधारना जरूरी
बाजार में 1,100 अंकों की तेजी को LTCG पर वित्त मंत्री के बयान के संभावित असर के तौर पर देखा गया। हालांकि, बाजार की लंबी अवधि की दिशा अर्थव्यवस्था और दूसरे कारकों पर भी निर्भर करेगी। फिलहाल, बाजार में लगातार बिकवाली देखने को मिल रही है। जब तक अर्थव्यवस्था में सुधार नहीं होगा, टैक्स हटाने की घोषणा भर से बाजार की स्थिति नहीं सुधरने वाली। अभी देश की इकॉनमी सुधारने पर जोर होना चाहिए।बजट हुआ गड़बड़
वस्तुओं का निर्यात करने वाली कंपनियों का कहना है कि शिपिंग की लागत पहले के मुकाबले 5-6 गुना ज्यादा हो गई है। भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति शृंखला प्रभावित हुई है और विनिर्माण कंपनियों की हालत खस्ता हैं। स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर का इस्तेमाल करने वाली कंपनियों की हालत बुरी है। कीमतों में अचानक आई तेजी से उनका बजट गड़बड़ हो गया है। इसलिए अभी निवेश से पहले यह देखना चाहिए कि किस सेक्टर के प्रभावित होने के आसार हैं और कौन-सा सेक्टर रक्षा कवच हो सकता है।रोजगार चाहिए
अभी देश में सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी है। सरकार को रोजगार के नए अवसर बनाने होंगे। इससे अर्थव्यवस्था में सुधार आएगा। अगर आप समस्या के बारे में पूछें तो फिलहाल चल रहे विरोध-प्रदर्शन हैं। जैसा सुना कि दिल्ली में कितनी दुकानें बंद हो गईं, उस दिन बहुत नुकसान हो गया। फिलहाल, यह देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मामले को कैसे डील करती है।
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