सरकार बोली-UPI पर लगने वाला शुल्क 4 हिस्सों में बंटेगा:ये पैसा खजाने में नहीं जाएगा; फिर दोहराया कि कस्टमर चार्ज नहीं देगा

Updated on 25-09-2026

2,000 रुपए से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लगने वाला 0.4% शुल्क यानी MDR ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, MDR का एक भी पैसा सरकारी खजाने में नहीं जाएगा। यह रकम UPI सिस्टम से जुड़े बैंकों और दूसरी संस्थाओं में बांटी जाएगी।

सरकार ने कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के उस आरोप को खारिज किया, जिसमें MDR को ग्राहकों पर लगाया जाने वाला टैक्स बताया गया था। सूत्रों ने कहा कि MDR न टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज।

कुल MDR में से 40% रकम ग्राहकों के बैंकों को मिलेगी। 30% पेमेंट गेटवे, 20% UPI ऐप और बाकी 10% रकम UPI ऐप के प्रायोजक बैंक को मिलेगी।

नए UPI नियम के विरोध में 2 अक्टूबर को विरोध

देशभर में व्यापारी और दुकानदार 2 अक्टूबर को UPI से पेमेंट नहीं लेंगे। सरकार के ₹2000 से ज्यादा के ट्रांजैक्शन पर 0.4% चार्ज के विरोध में व्यापारी संगठनों ने इस दिन नो UPI डे मनाने का ऐलान किया है।

इस दिन व्यापारी अपनी दुकानों पर लगे UPI QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और अन्य डिजिटल पेमेंट डिवाइसेस को काले कपड़े से ढककर विरोध जताएंगे। व्यापारियों की सरकार से 15 अक्टूबर से लागू होने जा रहे चार्ज को हटाने की मांग है।

महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे ने बताया कि यह आंदोलन सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देशभर के 500 से ज्यादा प्रमुख व्यापारी संगठन इसमें हिस्सा लेंगे।

व्यापारी संगठनों का UPI चार्ज के विरोध में तर्क

रिटेल व्यापारी और डिस्ट्रीब्यूटर कम मार्जिन पर काम करते हैं। डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त चार्ज थोपने से लागत बढ़ेगी।

डिजिटल पेमेंट का उद्देश्य प्रोसेस को आसान बनाने के लिए होना चाहिए, व्यापारियों पर बोझ डालना के लिए नहीं।

UPI से कैश का चलन घटा है। व्यापारी सिस्टम को पारदर्शी बनाने में सहयोग कर रहे, तो उन पर शुल्क लगाना सही नहीं।

डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के बजाय व्यापारियों पर चार्ज लगाना सजा देने जैसा है।

सरकार ने इस फैसले पर फिर विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

व्यापारियों पर UPI के नए MDR नियम

बड़े व्यापारियों पर 0.4% चार्ज: महीने में ₹1 लाख से ज्यादा कमाने वाले व्यापारियों (पर्सन-टू-मर्चेंट) को ₹2,000 से ज्यादा के हर पेमेंट लेने पर 0.4% MDR+GST देना होगा।

छोटे व्यापारियों को राहत: जिन व्यापारियों की महीने में UPI से कुल कमाई ₹1 लाख तक है, उन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा, चाहे ट्रांजैक्शन ₹2,000 से ज्यादा ही क्यों न हो।

कैटेगरी बदलने का नियम: अगर कोई छोटा दुकानदार लगातार 3 महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा UPI कलेक्शन लेता है, तो बैंक उसे ऑटोमेटिक 'बड़े मर्चेंट' (पर्सन-टू-मर्चेंट) की कैटेगरी में शिफ्ट कर देंगे। फिर उसे भी चार्ज देना होगा।

₹2,000 तक की बिक्री फ्री: बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 या उससे कम के छोटे पेमेंट्स पर कोई फीस नहीं देनी होगी।

मैक्सिमम चार्ज की लिमिट: ₹75,000 या उससे बड़े ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट से मैक्सिमम ₹300+GST ही चार्ज लिया जाएगा।

लिमिट हर ट्रांजैक्शन पर लागू: ₹2,000 की लिमिट पूरे दिन की कुल बिक्री पर नहीं, बल्कि हर एक पेमेंट पर देखी जाएगी।

खास सेक्टर्स के लिए सिर्फ ₹5 की फ्लैट फीस: पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और एजुकेशन से जुड़े व्यापारियों को ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर 0.40% के बजाय फ्लैट ₹5 देना होगा।

कार्ड के मुकाबले फिर भी सस्ता: क्रेडिट कार्ड (1.5%-2.5%) और डेबिट कार्ड (0.90% तक) के मुकाबले UPI पर MDR चार्ज काफी कम है।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या होता है?

मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR, यह वह फीस होती है जो कोई व्यापारी या दुकानदार डेबिट/क्रेडिट कार्ड या डिजिटल पेमेंट (UPI) की सुविधा यानी पॉइंट ऑफ सेल मशीन या पेमेंट गेटवे का उपयोग करने के बदले बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देता है।

यह फीस डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसफर नेटवर्क को सही से चलाने की लागत को पूरा करने के लिए लिया जाता है। यह चार्ज व्यापारी को देना होता है, ग्राहक को नहीं।


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