राम मंदिर बन गया राम लला भी बिराजमान हो गए वहीं राजधानी में मुख्यमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के सभी करीबियों को किनारे कही कोने में फेंक दिया।अब जन चर्चा का विषय है कि ऐसा तो तब होता है जब विपक्ष सत्ता में आता है पर यहाँ तो सत्ता पक्ष ही अपने ही पूर्व मुख्यमंत्री को चोट पर चोट दिए जा रहे।अब यह भी कहने की बातें हो रही कि मोहन यादव में तो दम नहीं है कि इतना बड़ा साहस जुटा पाएं ये तो दिल्ली दरबार से ही इशारा होता है।जनसंपर्क विभाग में जिस विज्ञापन घोटालों की बातें होती थी शिवराज के समय वह तो अभी भी हो रहा है बे मतलब के पेज रंगे जा रहे जो न कोई छाप छोड़ पा रहे न ही कोई परिवर्तन तो फिर जमे जमाये अधिकारियों को क्यों बदल दिया गया।मोदी और राम के नाम की लहर से जब भाजपा चुनाँव जीत ही जाएगी तो जनता का रुपया सेठों को क्यों दिया जा रहा आखिर सरकार का विजन क्या है ? जो वचन दिए उस दिशा में कोई फैसला नहीं हो रहा बस अधिकारियों को बदला जा रहा माना कि चुनाव आयोग का आदेश है 3 साल का पर 3 साल की सीमा में बहुत से अधिकारी आ रहे उनको कोई नहीं छेड़ रहा।अब मप्र सरकार को चाहिए कि मोदी की गारंटी पर काम करे नहीं तो जनता है बहुत जल्दी मुद्दों को पकड़ लेती है और जनसंपर्क के माध्यम से फिजूल खर्ची रुकवाने का प्रयास करें तो जनहितकारी होगा।