अफसरों ने कहा था सील या पंचनामा के बाद दोबारा व्यावसायिक गतिविधियां मिलने पर संचालक के खिलाफ एफआईआर कराई जाएगी। इसके बावजूद कार्रवाई तो दूर, अफसर मौके पर जाकर देख रेख भी तक नहीं कर रहे हैं। बता दें कि निगम द्वारा सील किए गए तीनों संस्थान सोमवार को दोपहर तक बंद रहे, लेकिन शाम होते ही फिर खुल गए। वहीं बचाव में सहायक यंत्री निशांत तिवारी ने कहा कि कि वे जबलपुर हाई कोर्ट में हैं और उन्हें मामले की जानकारी नहीं है। वहीं, अरेरा कॉलोनी, 10 नंबर मार्केट, रोहित नगर, बावड़ियाकलां, गौतम नगर और रचना नगर में भी प्रतिष्ठान खुले मिले। इक्का-दुक्का प्रतिष्ठान बंद थे।
हकीकत यह... खुद ही दुकानों पर बोर्ड लगाया, निगम ने पंचनामा बनाया, लेकिन यहां कारोबार
8084 नोटिस- 245 को सिर्फ 24 घंटे की मोहलत 31 जुलाई और 1 अगस्त की सीलिंग के दौरान 65 ने खुद व्यवसाय बंद कर लिए थे। इसके बाद पूरे महीने में निगम ने 8084 नोटिस दिए। इनमें 245 को ही 24 घंटे का नोटिस जारी हुआ। निगम ने कुल 62,500 ऐसे संस्थान चिह्नित किए हैं, जो आवासीय में चल रहे हैं।
आरोप- अफसर रसूखदारों को बचा रहे, झूठ फैलाया याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी ने कहा कि निगम की सीलिंग दिखावा है। बोर्ड ढककर भीतर अवैध कारोबार चलवाए जा रहे हैं। कोर्ट में आंकड़े बढ़ाने के लिए 2022 में बंद लोटस जैसी पुरानी कार्रवाई पेश कर भ्रम फैलाया। 10 नंबर और अरेरा के बड़े मॉल्स छोड़कर छोटे दुकानदारों पर कार्रवाई हो रही है।
सीलिंग 50 याचिकाओं पर सुनवाई, फैसला सुरक्षित
भोपाल में सीलिंग कब्जों से जुड़े 50 मामलों पर सोमवार को हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ में सुनवाई हुई। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने प्रभावित पक्षों और शासन की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया। सीलिंग कार्रवाई से जुड़े करीब 200 मामले हाईको र्ट में लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इनके निपटारे के लिए 15 सितंबर की समय-सीमा तय की है।