डॉलर ना यूरो, सबसे बड़ा रुपया! सर्कुलेशन के मामले में कहीं आगे है अपनी करेंसी

Updated on 19-08-2026
नई दिल्ली: अमेरिकी डॉलर को दुनिया की सबसे ताकतवर करेंसी माना जाता है। कई दशकों से इसका दबदबा चला आ रहा है। डॉलर दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली करेंसी है और कई देशों में लीगल टेंडर है। लेकिन सर्कुलेशन नंबर के मामले में डॉलर रुपये से पीछे है। RBI के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू का कहना है कि सर्कुलेशन में अमेरिकी डॉलर के नोटों की तुलना में रुपये के नोट तीन गुना और यूरो नोटों की तुलना में लगभग छह गुना ज्यादा हैं।

हालांकि नोटों की संख्या कई चीजों पर निर्भर करती है। जैसे जीडीपी ग्रोथ, महंगाई और ब्याज दरें। लेकिन RBI पॉलीमर का इस्तेमाल करके नोटों की उम्र बढ़ाकर करेंसी की लागत को कम करने की कोशिश कर रहा है।

भारत में कुल कितने नोट?

मुर्मू ने कहा, "पिछले कुछ साल में हमने हर साल छह अलग-अलग वैल्यू वाले 28 से 30 अरब नोट छापे हैं और लगभग 21 अरब नोट हर साल हटाए हैं। आज भारत में 176 अरब नोट चलन में हैं। इसकी तुलना में, पिछले साल के आखिर में लगभग 56 अरब अमेरिकी डॉलर के नोट और 30 अरब यूरो के नोट चलन में थे।"

उन्होंने कहा कि यह तुलना आंशिक रूप से भारत में अलग-अलग वैल्यू वाले नोटों के मिक्स को दिखाती है। इनमें कम वैल्यू वाले नोट ज्यादा हैं और इसलिए उतनी ही वैल्यू के ट्रांजैक्शन के लिए ज्यादा नोटों की जरूरत होती है।

कैसे नोट बांटता है RBI?

मूर्मू ने 13 अगस्त को जकार्ता में बैंक इंडोनेशिया द्वारा आयोजित कैश मैनेजमेंट कॉन्फ्रेंस में कहा कि नोटों की यह संख्या हमें उस लॉजिस्टिक्स के पैमाने का अंदाजा देती है जिसे हम रोजाना मैनेज करते हैं।
हाल के वर्षों में डिजिटल पेमेंट में भारी बढ़ोतरी के बावजूद कैश का इस्तेमाल भी बढ़ा है। मुर्मू ने कहा, "डिजिटल पेमेंट के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से भले ही अलग-अलग ट्रांजैक्शन में कैश का हिस्सा कम हो रहा हो, लेकिन करेंसी इन सर्कुलेशन की मात्रा दोहरे अंकों की दर से बढ़ रही है।" उन्होंने इसे कैश पैराडॉक्स बताते हुए कहा कि इससे भविष्य की मांग का अनुमान लगाना मुश्किल हो जाता है।

RBI अपने 19 क्षेत्रीय कार्यालयों और कमर्शियल तथा कोऑपरेटिव बैंकों और सरकारी ट्रेजरी द्वारा चलाए जा रहे करेंसी चेस्ट के नेटवर्क के जरिए करेंसी बांटता है। करेंसी आम लोगों तक बैंक शाखाओं, 2,50,000 से ज्यादा ATM, कैश डिस्पेंसर और ग्रामीण इलाकों और छोटे कस्बों में लाखों बिजनेस करेस्पोंडेंट के जरिए भी पहुंचती है।

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