मुनाफा कूटकर भागने लगे निवेशक,लिस्टिंग के बाद Tempsens Instruments का शेयर लुढ़का

Updated on 29-08-2026
नई दिल्ली: कल शुक्रवार को मेन बोर्ड से टेम्पसैंस इंस्ट्रूमेंट्स का आईपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हुआ। इसने लिस्टिंग पर ही निवेशकों को करीब 110 फीसदी मुनाफा दिया। बाद में शेयर में कुछ और तेजी आई, लेकिन मार्केट बंद होते-होते यह शेयर करीब 7 फीसदी लुढ़क गया। ऐसे में माना जा रहा है कि निवेशक लिस्टिंग पर मुनाफा लेकर इससे अलग हो गए।

थर्मल इंजीनियरिंग और इंस्ट्रूमेंटेशन क्षेत्र की कंपनी Tempsens Instruments का आईपीओ शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स पर इश्यू प्राइस 300 रुपये के मुकाबले 110 फीसदी प्रीमियम के साथ 631.20 रुपये पर लिस्ट हुआ। वहीं एनएसई पर यह 111 फीसदी प्रीमियम के साथ लिस्ट हुआ था। यानी IPO में शेयर पाने वाले निवेशकों की लिस्टिंग के साथ ही रकम दोगुने से ज्यादा हो गई।

लिस्टिंग के बाद तेजी, फिर धड़ाम

लिस्टिंग के बाद भी शेयर में तेजी जारी रही। बीएसई पर यह 631.20 रुपये तक पहुंच गया था। हालांकि, ऊपरी स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिली और शेयर 7.03% गिरकर 586.80 रुपये पर बंद हुआ। एक समय यह गिरकर 551.20 रुपये पर आ गया था। यानी लिस्टिंग प्राइस के मुकाबले इसमें 12.67 फीसदी की गिरावट आ गई थी। इसके बावजूद यह IPO इश्यू प्राइस से करीब 96 फीसदी ऊपर कारोबार कर रहा है।

निवेशकों में काफी लोकप्रिय रहा आईपीओ

  • Tempsens Instruments का 650 करोड़ रुपये का आईपीओ निवेशकों के बीच बेहद लोकप्रिय रहा था।
  • तीन दिनों की बोली के दौरान इश्यू को करीब 184 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।
  • आईपीओ में 95 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू और 555 करोड़ रुपये का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल था।

कंपनी क्या करती है?

टेम्पसैंस इंस्ट्रूमेंट्स थर्मल इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स और स्पेशलाइज्ड केबल्स के कारोबार में है। कंपनी तापमान सेंसर, नॉन-कॉन्टैक्ट तापमान सेंसर, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल्स जैसे उत्पाद बनाती है।

अब क्या करें निवेशक?

एसबीआई सिक्योरिटीज के मुताबिक, जिन निवेशकों को आईपीओ में शेयर अलॉट हुए हैं, वे अपने जोखिम प्रोफाइल को ध्यान में रखते हुए लंबी अवधि के लिए होल्ड कर सकते हैं। वहीं, जिन निवेशकों ने सिर्फ लिस्टिंग गेन के लिए आईपीओ में पैसा लगाया था, वे मौजूदा तेजी में प्रॉफिट बुक करने पर विचार कर सकते हैं।
नए निवेशकों के लिए मौजूदा ऊंचे स्तरों पर शेयर के पीछे भागने के बजाय 'Buy on Dips' यानी गिरावट पर खरीदारी की रणनीति अपनाने की सलाह दी गई है।

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