रियाद/सना: सऊदी अरब समर्थित और अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त यमन की सरकार ने कहा है कि हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य में शिपिंग में बाधा डालकर ईरान की होर्मुज वाली रणनीति अपना रहा है। हाल के दिनों में हूतियों ने लाल सागर में जहाजों को निशाना बनाया है। हूती समूह की यमन के उत्तरी-पश्चिमी क्षेत्र के बड़े इलाके पर कब्जा है, जिसमें राजधानी सना भी शामिल है। यह इलाका लाल सागर और अदन की खाड़ी के पास पड़ता है। इस रास्ते से होकर दुनिया का सबसे अहम शिपिंग मार्ग गुजरता है।यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार की विदेश मंत्री अफराह अल-जोबा ने कहा कि ईरान समर्थित यह समूह दुनिया के सबसे प्रमुख शिपिंग मार्गों में से एक पर प्रभाव जमाने की कोशिश कर रहा है। अल-जोबा ने सोमवार को रियाद में पत्रकारों से बात की। इस दौरान उन्होंने कहा, "हूती विद्रोही ईरान के मॉडल की नकल करना चाहते हैं। इससे दो मुख्य जलडमरूमध्य बंद हो जाएंगा, जो फारस की खाड़ी और लाल सागर के प्रवेश द्वार हैं।"लाल सागर में हूतियों ने खोला नया मोर्चा
अमेरिका और ईरान के बीच टकराव के बीच लाल सागर तनाव के एक नए मोर्चे के रूप में उभरा है। हूती समूह ने पिछले सोमवार को लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की घोषणा की। इसने सऊदी तेल टैंकरों को निशाना बनाते हुए हमले किए। सऊदी अरब ने जवाबी कार्रवाई करते हुए हूती सैन्य ठिकानों पर हमले किए। वहीं हूतियों ने मिसाइल और ड्रोन के जरिए सऊदी अरब के खिलाफ कार्रवाई की।
लाल सागर क्यों हैं अहम?
- लाल सागर एक अहम व्यापारिक जलमार्ग है, जो हिंद महासागर से आने वाले जहाजों को भूमध्य और अटलांटिक से जोड़ता है।
- अदन की खाड़ी से होते हुए जहाज लाल सागर में प्रवेश करते हैं, जो आगे स्वेज नहर से होते हुए भूमध्य सागर में उतरते हैं।
- लाल सागर का रास्ता असुरक्षित होने पर जहाजों को अफ्रीका का पूरा चक्कर लगाकर फिर अटलांटिक होते हुए यूरोप तक पहुंचना पड़ता है।
- इस प्रक्रिया में समय और खर्च बढ़ जाता है, जिसका असर माल ढुलाई के भाड़े पर पड़ता है। अंत में यह कीमतों के बढ़ने की वजह बनता है।
- भारतीय जहाज भी यूरोप के लिए इसी जलमार्ग का इस्तेमाल करते हैं, ऐसे में इसका बंद होना भारतीयों पर भी असर डालेगा। भारत पहले ही होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रुकने से प्रभावित रहा था।
यमन में फिर सें जग शुरू होने का खतरा
ताजा तनाव में यमन में एक बार फिर से बड़े पैमाने पर जंग शुरू होने की आशंका बढ़ा दी है। इसके पहले साल 2014 में हूती विद्रोहियों के राजधानी सना पर कब्जा करने के बाद देश में लंबा युद्ध शुरू हुआ था। इसमें सऊदी के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन में यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के समर्थन में हस्तक्षेप किया था। साल 2022 में एक शांति समझौते के बाद अब तक शांति रही है, लेकिन हालिया सीमा पार हमलों ने तनाव बढ़ा दिया है।ईरानी विदेश मंत्री की सऊदी और ओमानी समकक्षों से बात
इस बीच सोमवार शाम को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सऊदी अरब और ओमान के विदेश मंत्रियों के साथ फोन पर अलग-अलग बात की और होर्मुज की सुरक्षा पर चर्चा की। अराघची के टेलीग्राम चैन पर एक बयान में यह जानकारी दी गई है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब सऊदी अरब ने कहा है कि उसने इराक में मौजूद ईरान समर्थित समूहों के देश पर दागे गए ड्रोन को मार गिराया है।