नई दिल्ली: फेस्टिव सीजन में महंगाई का एक और झटका लगने वाला है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सीमेंट कंपनियां इसी महीने कीमतें प्रति बैग 10 से 15 रुपये कीमत बढ़ा सकती हैं। ऐसा लगातार बढ़ती इनपुट लागत के दबाव से निपटने के लिए किया जा रहा है, जबकि सीमेंट की बिक्री (वॉल्यूम ऑफटेक) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। रिपोर्ट में बताया गया है कि सीमेंट कंपनियों ने पहली तिमाही में कीमतें 10 से 15 रुपये प्रति बैग बढ़ाई थीं, लेकिन ये बढ़ोतरी बिजली और ईंधन के बढ़ते खर्चों की भरपाई के लिए काफी नहीं थी।एमके रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक पूरे सेक्टर में प्लांट विस्तार के कार्यक्रमों में देरी के कारण भी क्लिंकर के इस्तेमाल की दरें बढ़कर 79 प्रतिशत तक पहुंच गईं। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया कि ईंधन की बढ़ती लागत पिछले 6-7 महीनों से सेक्टर के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है, हालांकि जुलाई 2026 में थोड़ी राहत मिली थी। हाल में कच्चे तेल की कीमत में काफी तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड लगातार 100 डॉलर के ऊपर बना हुआ है।रीजनल मार्केट्स में खपत
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि सीमेंट की बिक्री में लगातार बढ़ोतरी सेक्टर को सहारा दे रही है और नॉन-ट्रेड डिमांड के कारण रीजनल मार्केट्स में खपत अच्छी बनी हुई है। रिपोर्ट में कहा गया है, "इंडस्ट्री में सीमेंट की बिक्री स्थिर रही है और वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में इसमें साल-दर-साल 7-8% की बढ़ोतरी होने की संभावना है। इसका मुख्य कारण नॉन-ट्रेड सेगमेंट है।"इसमें अनुमान लगाया गया है कि अगले डेढ़ साल तक मांग की यह तेजी बनी रहेगी। इसे मुख्य रूप से मौसमी और चुनाव से पहले होने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्यों से बढ़ावा मिलेगा। रिपोर्ट में कहा गया है, "उम्मीद है कि अगले 18 महीनों में मांग काफी मजबूत रहेगी। कंस्ट्रक्शन के व्यस्त सीजन (2HFY27) के 6 महीने और उसके बाद 1HCY29 में होने वाले आम चुनावों की वजह से ज्यादा मांग वाले 12 महीने (FY28)।"क्यों बढ़ानी पड़ रही है कीमत?
साथ ही, इसमें यह भी बताया गया है कि फाइनेंशियल ईयर 2026 से 2028 के दौरान कुल मांग की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 7 प्रतिशत बनी रहेगी। लगातार सप्लाई के बावजूद ज्यादा ऑपरेटिंग खर्च कंपनियों के मुनाफे पर भारी पड़ रहा है। इनपुट की ज्यादा लागत (300-400 रुपये प्रति टन) पिछले 6-7 महीनों से इंडस्ट्री के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है । इसका पूरा असर दूसरी तिमाही (2Q) की कमाई में दिखने की संभावना है। साथ ही इसके 2HFY27 में भी बने रहने की काफी संभावना है।पेटकोक और इम्पोर्टेड कोयले के स्पॉट भाव अपनी दूसरी तिमाही की औसत कीमतों से क्रमशः लगभग 20 प्रतिशत और 16 प्रतिशत ज्यादा हैं, जो क्रमशः 175 डॉलर प्रति टन और 150 डॉलर प्रति टन हैं। पॉलीप्रोपाइलीन ग्रेन्यूल की कीमतें 135 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर जाने के कारण पैकेजिंग का खर्च भी बढ़ गया है।
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि लागत में बढ़ोतरी (300-400 रुपये प्रति टन) की भरपाई के लिए, इंडस्ट्री को लगातार कीमतों में लगभग 10 रुपये प्रति बैग की बढ़ोतरी की जरूरत होगी। इसलिए, अक्टूबर में कीमतों में बढ़ोतरी बहुत जरूरी है। ईंधन के ज्यादा बिल और नेगेटिव ऑपरेटिंग लेवरेज के कारण दूसरी तिमाही की कमाई में प्रति टन 200 से 250 रुपये की अनुमानित गिरावट आ सकती है।