बैंक में कैश जमा करना पड़ा भारी, इनकम टैक्स ने भेजा नोटिस, APMC बिल दिखाकर ITAT में जीता किसान

Updated on 26-09-2026
नई दिल्ली: बैंक खाते में बड़ी रकम नकद जमा करने के बाद अगर इनकम टैक्स विभाग नोटिस भेज दे तो परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है। बेंगलुरु के बालकृष्णमूर्ति रामचंद्रबाबू के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। उन्होंने अपनी कृषि भूमि पर सब्जियां और फल उगाकर स्थानीय APMC (कृषि उपज मंडी समिति) में बेचे थे और बिक्री से मिली रकम बैंक खाते में जमा की थी। आयकर विभाग ने इन नकद जमा को लेकर सवाल उठाए, लेकिन बाद में बेंगलुरु ITAT (आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण) ने उनके पक्ष में फैसला दिया।

क्या था पूरा मामला?

रामचंद्रबाबू ने अपने एसबीआई बैंक खाते में बड़ी मात्रा में नकदी जमा की थी और साथ ही संपत्ति की खरीद-बिक्री भी की थी। आयकर विभाग को उनके इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) में इस लेन-देन का ब्योरा नहीं मिला, जिसके आधार पर उन्हें नोटिस भेजा गया।
रामचंद्रबाबू ने बताया कि उनके पास 4 एकड़ 4 गुंटा कृषि भूमि है, जिस पर वे फल और सब्जियां उगाते हैं। उन्होंने इस उपज को स्थानीय APMC में नकद बेचा था और वही पैसा बैंक में जमा कराया। उन्होंने कहा कि चूंकि कृषि आय टैक्स फ्री होती है, इसलिए अज्ञानता के कारण उन्होंने इसे आईटीआर में दर्ज नहीं किया था।

आयकर विभाग और CIT(A) ने खारिज किया दावा

  • इनकम टैक्स अधिकारी (AO) का तर्क था कि सरकारी जमीन के रिकॉर्ड (RTC) में यह नहीं लिखा था कि जमीन पर कौन सी फसल उगाई गई थी।
  • किसान के पास बीज, उर्वरक और खेती के अन्य खर्चों के पक्के बिल/रसीदें नहीं थीं।
  • पूर्ववर्ती और बाद के वर्षों के आईटीआर में कृषि आय का कोई उल्लेख नहीं था।
  • इन तर्कों के आधार पर AO और उसके बाद कमिश्नर ऑफ अपील्स CIT(A) ने किसान की अपील खारिज कर दी थी। इसके बाद मामला ITAT बेंगलुरु पहुंचा।

ITAT ने किसान के पक्ष में सुनाया फैसला

ITAT बेंगलुरु ने आयकर विभाग के दावे को खारिज कर दिया। आईटीएटी ने कहा कि किसान ने एपीएमसी यार्ड के बिक्री बिल और जमीन के दस्तावेज जमा किए थे। एपीएमसी राज्य सरकार का एक मान्यता प्राप्त संस्थान है, इसलिए उसके द्वारा जारी बिलों को खारिज नहीं किया जा सकता।
आईटीएटी के मुताबिक एओ ने अपनी ओर से किसान के दावों की कोई स्वतंत्र जांच या वेरिफिकेशन नहीं कराया, न ही कोई विपरीत सबूत पेश किया। वहीं अदालत ने माना कि छोटे स्तर की खेती में बीज या खाद के पक्के बिल रखना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं होता।

आईटीआर में कृषि आय न दिखाना केवल एक अनुपालन संबंधी चूक थी। अगर सोर्स के पर्याप्त दस्तावेज (APMC बिल और भूमि रिकॉर्ड) मौजूद हैं, तो केवल ITR में न दिखाने के आधार पर जमा नकदी को धारा 69A के तहत अघोषित आय नहीं माना जा सकता। ऐसे में किसान को आईटीएटी से राहत मिली।

अन्य महत्वपुर्ण खबरें