मूक फिल्म से डेब्यू, ललिता पवार हिरोइन की जगह बनीं अत्याचारी सास, क्यों उनके नाम है गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड
Updated on
24-02-2026
बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी एक्टिंग इतनी दमदार होती है कि लोग उन्हें हमेशा याद रखते हैं। उनमें से एक नाम है ललिता पवार का। उनकी एक्टिंग इतनी दमदार होती थी कि उनका किरदार लोगों के जेहन में बस जाता था। छोटे बच्चों से लेकर बड़ों तक, सभी उनके नेगेटिव किरदारों से डरते थे। लेकिन, असल जिंदगी में ललिता एक बेहद मेहनती एक्ट्रेस थीं।बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस ललिता पवार के बिना बॉलीवुड की खलनायिका की छवि अधूरी लगती है। आज उनकी पुण्यतिथि पर हम ललिता पवार की उस उपलब्धि के बारे में बात करेंगे, जिसमें उन्होंने एक ही फिल्म में 17 अलग-अलग किरदार निभाए थे।
ललिता पवार का जन्म 18 अप्रैल 1916 को महाराष्ट्र के नासिक जिले में हुआ था। उनका असली नाम अंबा लक्ष्मण राव सगुन था। उनके पिता रेशम व्यापारी थे और मां घर संभालती थीं। बचपन से ही ललिता को एक्टिंग का शौक था, और उनकी प्रतिभा को देखकर उनके माता-पिता ने उन्हें फिल्मों में कदम रखने की अनुमति दी।
तब भारत में फिल्में मूक युग की थीं
ललिता ने महज 9 साल की उम्र में अपनी पहली फिल्म 'राजा हरिश्चंद्र' (1928) से करियर की शुरुआत की। उस समय भारत में फिल्में मूक युग की थीं, लेकिन ललिता ने छोटी सी उम्र में अभिनय का जलवा दिखाया। एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, और यही उनकी फिल्मी दुनिया की शुरुआत थी।
आंख की नस फट गई और शरीर के एक हिस्से में लकवा मार गया
समय के साथ ललिता ने बड़ी हीरोइन बनने की ठानी, लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने उनकी जिंदगी का रास्ता बदल दिया। 1942 में रिलीज हुई फिल्म 'जंग-ए-आजादी' की शूटिंग के दौरान, एक सीन में को-एक्टर को उन्हें थप्पड़ मारना था। उस एक्टर ने ललिता को इतनी जोर से थप्पड़ मारा कि वह फर्श पर गिर पड़ी, उनकी आंख की नस फट गई और शरीर के एक हिस्से में लकवा मार गया। इसके कारण उन्हें कुछ सालों तक फिल्मों से दूर रहना पड़ा और उनका हीरोइन बनने का सपना अधूरा रह गया।
'अत्याचारी सास' और नेगेटिव रोल में पहचानने लगे
लेकिन, ललिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को नए रोल्स के लिए ढाला और साइड किरदार और वैम्प की भूमिकाओं में अपनी पहचान बनाई। उनकी दमदार एक्टिंग के चलते दर्शक उन्हें 'अत्याचारी सास' और नेगेटिव रोल में पहचानने लगे। खासकर रामानंद सागर की रामायण में मंथरा का किरदार उनके करियर का अहम मोड़ बन गया। मंथरा के किरदार ने उन्हें घर-घर में प्रसिद्ध कर दिया और उनकी खलनायिका की छवि को और मजबूत किया।
उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज
ललिता पवार ने अपने लंबे करियर में लगभग 700 फिल्मों में काम किया, जिनमें हिंदी, मराठी और गुजराती फिल्में शामिल थीं। उन्होंने एक्टिंग में इतनी मेहनत और स्थिरता दिखाई कि उनका नाम गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में सबसे ज्यादा समय तक एक्टिंग करियर रखने वाली एक्ट्रेस के रूप में दर्ज हुआ।
फिल्म 'चतुर सुंदरी' में 17 अलग-अलग अंदाज
वहीं उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि ये रही जिसमें उन्होंने फिल्म 'चतुर सुंदरी' में 17 अलग-अलग किरदार निभाए। यह बेहद चुनौतीपूर्ण था। हर किरदार का स्वभाव, अंदाज और भाव अलग-अलग था, कभी गंभीर, कभी हास्यपूर्ण, कभी चालाक और कभी मासूम। दर्शक यह देखकर दंग रह गए कि यह सब एक ही एक्ट्रेस ने किया है।
मंथरा का किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बना ली
रामानंद सागर की 'रामायण' में मंथरा का किरदार निभाकर उन्होंने घर-घर में अपनी पहचान बना ली। उनकी फिल्मों, उनके किरदारों और उनके रिकॉर्ड ने उन्हें अमर बना दिया। बॉलीवुड की दुनिया में सफलता के बावजूद ललिता का जीवन हमेशा आसान नहीं रहा। मुंह के कैंसर के कारण 24 फरवरी 1998 को उनका निधन हो गया।
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