अब नहीं चलेगी चीन की दादागिरी! भारत को पड़ोस में मिला रेयर अर्थ का खजाना

Updated on 23-07-2026
नई दिल्ली: रेयर अर्थ को नए जमाने की टेक्नोलॉजी की रीढ़ कहा जाता है। इनका यूज इलेक्टिक वीकल, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन और डिफेंस में होता है। अभी इसकी सप्लाई चेन पर चीन का दबदबा है और वह इसे स्ट्रैटजिक टूल की तरह यूज कर रहा है। लेकिन भारत ने अब इसका तोड़ निकाल लिया है। भारत लंबे समय से चीन का विकल्प तलाश रहा था और म्यांमार के रूप में उसकी तलाश पूरी हो सकती है। दोनों देश रेयर अर्थ के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं।

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय टीमों ने हाल में म्यांमार का दौरा किया है। म्यांमार में भारत के राजदूत अभय ठाकुर ने बुधवार को मांडले में एक माइनिंग फोरम की शुरुआत के मौके पर रेयर अर्थ के मामले में दोनों देशों के बीच बढ़ते आपसी सहयोग के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि पिछले दो साल में माइनिंग सेक्टर में सहयोग ने काफी तेजी पकड़ी है। रेयर अर्थ और ज़रूरी खनिजों पर चर्चा के लिए दो भारतीय प्रतिनिधिमंडलों ने दिसंबर 2024 और फरवरी 2026 के बीच म्यांमार का दौरा किया था।

चीन की भूमिका

ठाकुर ने बताया कि मई-जून में म्यांमार के राष्ट्रपति मिन आंग ह्लाइंग की भारत की आधिकारिक यात्रा के दौरान भी इस मामले पर उच्च-स्तरीय चर्चा हुई थी। दुनिया की लगभग आधी 'हेवी रेयर अर्थ' सप्लाई म्यांमार के काचिन प्रांत की खदानों से निकाली जाती है। इसके बाद इन्हें चीन भेजा जाता है, जहां इनसे मैग्नेट बनाए जाते हैं। ये इलेक्ट्रिक वाहनों और विंड टर्बाइन को चलाने में काम आते हैं।

चीन ने पिछले साल अप्रैल में रेयर अर्थ मैग्नेट्स का एक्सपोर्ट बंद कर दिया था। इससे भारत और अमेरिका समेत दुनिया के कई देश इससे परेशान हो गए थे। इनका इस्तेमाल ऑटो और इलेक्ट्रॉनिक्स समेत कई सेक्टर्स में होता है। चीन रेयर अर्थ्स का क्रिटिकल सप्लायर है। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक उसका रेयर अर्थ प्रॉडक्शन 2014 से तीन गुना हो चुका है।

म्यांमार का प्रोडक्शन

चीन ने साल 2024 में 270,000 मीट्रिक टन रेयर अर्थ का उत्पादन किया जो ग्लोबल प्रॉडक्शन का 69% है। इसकी तुलना में अमेरिका का उत्पादन 45,000 टन और म्यांमार का प्रोडक्शन 31,000 टन रहा था। ग्लोबल प्रोडक्शन में अमेरिका की हिस्सेदारी 11 फीसदी और म्यांमार की हिस्सेदारी 8 फीसदी है।

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