ब्रह्मोस मिसाइल ने चीनी एयर डिफेंस को भेदा, फिलिपीनी मरीन को वारगेम में मिले शानदार नतीजे, ड्रैगन की बढ़ेगी टेंशन!

Updated on 12-10-2026
मनीला: फिलीपीन मरीन कॉर्प्स की ब्रह्मोस एंटी-शिप मिसाइलों ने नकली चीनी नौसेना बलों के खिलाफ वॉरगेम में शानदार नतीजे दिखाए हैं। भारत में बनी सुपरसोनिक मिसाइल एकमात्र ऐसा हथियार साबित हुई, जो चीनी गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर की हवाई सुरक्षा को भेदने में सक्षम रही। फिलीपीन मरीन अपनी ब्रह्मोस बैटरी को चलाने में महारत हासिल करने के लिए इंटरनल वॉरगेमिंग का इस्तेमाल कर रहे हैं क्योंकि दक्षिण चीन सागर में चीन के साथ तनाव के बीच देश अपनी तटीय स्ट्राइक क्षमताएं बढ़ा रहा है।

नेवल न्यूज ने बताया है कि फिलीपीन मरीन कॉर्प्स के इंटरनल सिमुलेशन में ऐसे हालात सामने आए जिनमें ब्रह्मोस एकमात्र ऐसा प्लेटफॉर्म था, जो चीनी गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर के एयर-डिफेंस सिस्टम को भेद सकता था। रिपोर्ट में उन इंटरनल सिमुलेशन के लिए किसी खास चीनी डिस्ट्रॉयर कॉन्फिगरेशन का नाम नहीं बताया गया। इससे पहले अगस्त 2026 में फिलीपीन और अमेरिका के बीच अलग से हुई ट्रेनिंग में नकली चीनी नौसैनिक लक्ष्यों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें टाइप 052D डिस्ट्रॉयर, टाइप 054A फ्रिगेट और टाइप 901 फास्ट कॉम्बैट सपोर्ट शिप शामिल थे।

फिलीपींस के अभ्यास

फिलीपीन मरीन, ब्रह्मोस के इस्तेमाल से जुड़ी ऑपरेशनल प्रक्रियाओं पर अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के साथ काम कर रहे हैं। उत्तरी लुजोन में अगस्त में हुई एक एक्सरसाइज के दौरान फिलीपीन और अमेरिकी सेनाओं ने ड्रोन का इस्तेमाल करके समुद्री स्ट्राइक किल चेन बनाने का अभ्यास किया। इसमें जमीन से लॉन्च होने वाली ब्रह्मोस बैटरी के लिए टारगेट की जानकारी तैयार करने से पहले नकली चीनी नौसैनिक टुकड़ियों का पता लगाया गया और उन्हें ट्रैक किया गया।

अगस्त की एक्सरसाइज के दौरान अमेरिकी और फिलीपीन सेनाओं ने नकली टारगेटिंग चेन में फिलीपीन वायु सेना के हर्मेस UAV का इस्तेमाल किया। इसका मकसद यह दिखाना था कि दुश्मन के समुद्री बलों के खिलाफ बिना पायलट वाले सर्विलांस सिस्टम और जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलें कैसे मिलकर काम कर सकती हैं।

फिलीपींस के पास ब्रह्मोस

फिलीपींस ने 2022 में हुए 375 मिलियन डॉलर के समझौते के तहत भारत से तीन ब्रह्मोस बैटरी खरीदी थीं। भारत ने इसी साल सितंबर में फिलीपींस को सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस की खेप पहुंचाई है। पहली बैटरी ऑपरेशनल हो गई है और उत्तरी लुजोन और दूसरी अन्य जगहों पर अतिरिक्त तैनाती की तैयारी चल रही है।

फिलीपींस को यह मिसाइल ऐसे समय मिली हैं, जब दक्षिण चीन सागर में फिलीपींस और चीन के सुरक्षाबलों के बीच हुई झड़प के बाद दोनों देशों में तनाव है। जुलाई में इस मुद्दे पर दोनों देशों ने एक दूसरे के राजनयिकों को तलब किया है। दोनों पक्षों में झड़प की यह घटना दक्षिण चीन सागर के सेकंड थॉमस शोल के पास हुई थी।

फिलीपींस-भारत में सौदा

फिलीपींस ने 2022 में भारत से 375 मिलियन डॉलर (करीब 3,000 करोड़ रुपए) का सौदा किया था, जिसमें तीन ब्रह्मोस बैटरी शामिल हैं। प्रत्येक बैटरी में 290 रेंज और मैक 2.8 की रफ्तार वाली मिसाइलें हैं। ब्रह्मोस फिलीपींस की नौसेना को तटीय रक्षा में, खासतौर से दक्षिण चीन सागर में चीन के दावों के खिलाफ ताकत देगा।

  • ब्रह्मोस एक सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है।
  • इसे भारत के DRDO और रूस के NPOM ने मिलकर विकसित किया है।
  • इसकी गति मैक 2.8 से मैक 3.0 (ध्वनि की गति से 3 गुना तेज, यानी करीब 3,700 किमी/घंटा) है।
  • इसे पनडुब्बी, युद्धपोत, लड़ाकू विमान और जमीन पर मौजूद मोबाइल लॉन्चर, तीनों जगह से दागा जा सकता है।

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