बांग्लादेश सीमा पर BSF ने अवैध प्रवासियों को 'भेजना' शुरू किया तो भड़के बांग्लादेशी, एक्सपर्ट ने दी धमकी
Updated on
08-06-2026
ढाका: बांग्लादेश के जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट ने चेतावनी दी है कि भारत अगर जबरदस्ती लोगों को सीमा के अंदर भेजता रहा तो द्विपक्षीय संबंध तनावपूर्ण हो सकते हैं। उनका कहना है कि भारतीय अधिकारियों की तरफ से लोगों को बांग्लादेश भेजने की लगातार कोशिशों से ढाका और दिल्ली के रिश्तों में और तनाव आ सकता है जबकि दोनों देशों के लिए स्थिर रिश्ते बनाए रखना बहुत जरूरी है। आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी की सरकार आने के बाद कथित तौर बांग्लादेश के अवैध नागरिकों को जबरदस्ती उनके देश भेजा जा रहा है।भारत उस वक्त 'अवैध' प्रवासियों को भेज रहा है जब बांग्लादेश में तारिक रहमान की सरकार बनने के बाद से दोनों देशों ने मोहम्मद यूनुस के समय खराब हुए संबंधों की मरम्मत शुरू कर दी है। इस बीच पंचगढ़ बॉर्डर पर पिछले तीन दिनों से फंसे हुए करीब 10 लोगों को लेकर भारत की बीएसएफ और बांग्लादेश के बीजीपी के बीच फ्लैग मीटिंग नाकाम हो गई है। आपको बता दें कि पंचगढ़ सदर उपजिले में बाराबारी-प्रधानपारा बॉर्डर पर 'नो-मैन्स लैंड' में दस लोग जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं तीन दिनों से फंसे हुए हैं। यह स्थिति तब बनी जब बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) ने भारत के बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) की कथित तौर पर लोगों को जबरन अंदर भेजने की कोशिश को नाकाम कर दिया।भारत-बांग्लादेश संबंध हो जाएंगे खराब- एक्सपर्ट
ढाका यूनिवर्सिटी में इंटरनेशनल रिलेशंस के पूर्व प्रोफेसर डॉ. सीआर अबरार ने द डेली स्टार से बात करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच कई मुद्दे लंबित हैं जैसे तीस्ता जल-बंटवारे का लंबे समय से लंबित समझौता अभी भी सुलझा नहीं है जबकि गंगा जल-बंटवारा संधि दिसंबर में खत्म हो रही है और इसके नवीनीकरण के लिए राजनीतिक बातचीत की जरूरत होगी। उन्होंने कहा 'लोगों को जबरन वापस भेजना और सीमा पर हत्याएं गैर-न्यायिक हरकतें हैं जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करती हैं।' उन्होंने कहा "लोगों को 'नो-मैन्स लैंड' में फंसाकर छोड़ देना एक मानवीय संकट पैदा करता है। यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है।"बांग्लादेश की BGB ने बताया है कि मई 2025 और इस साल जनवरी के बीच कम से कम 2,303 लोगों को बांग्लादेश भेजा गया है। इनमें 126 भारतीय नागरिक और 38 म्यांमार के नागरिक शामिल थे। इसपर सीआर अबरार ने कहा 'इससे पता चलता है कि जब अधिकारी उन लोगों को वापस भेजते हैं जिन्हें वे बांग्लादेशी मानते हैं तो यह प्रक्रिया कितनी दोषपूर्ण और मनमानी हो सकती है।' आपको बता दें कि 30 अप्रैल को इस मामले को लेकर बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर पवन बधे को तलब किया था और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की टिप्पणियों को 'अपमानजनक' बताया।बांग्लादेश के अवैध प्रवासियों को लेकर भारत ने क्या कहा?
असम के मुख्यमंत्री ने 15 अप्रैल को एक इंटरव्यू में कहा था कि सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद इस साल 1,400 से ज्यादा लोगों को वापस भेजा गया है। कुछ दिनों बादउन्होंने X पर पोस्ट किया था कि बिना कागजात वाले बांग्लादेशी प्रवासियों के 20 लोगों को पकड़ा गया और वापस भेज दिया गया। वहीं भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने बांग्लादेश को बताया कि उसने सितंबर 2020 से नागरिकता की पुष्टि का इंतज़ार कर रहे 2,868 संदिग्ध अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के बारे में 1,137 राजनयिक नोट और 456 रिमाइंडर भेजे हैं लेकिन उसे कोई 'ठोस जवाब' नहीं मिला है।
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