$778,200,000,000... भारत पर इतना विदेशी कर्ज कि गिनते-गिनते थक जाएंगे, विदेशी मुद्रा भंडार भी पड़ जाएगा कम
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01-10-2026
नई दिल्ली: भारत का विदेशी कर्ज मार्च तिमाही के मुकाबले जून तिमाही में 15.4 अरब डॉलर बढ़कर 778.2 अरब डॉलर हो गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के बुधवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। हालांकि, जीडीपी के अनुपात में विदेशी कर्ज जून, 2026 के अंत में घटकर 20.8 प्रतिशत रहा, जो 31 मार्च, 2026 को 20.9 प्रतिशत था। 18 सितंबर 2026 को समाप्त सप्ताह के दौरान भारत का विदेशी मुद्रा भंडार $765.901 अरब था।आरबीआई ने कहा, ‘येन और यूरो जैसी प्रमुख मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी डॉलर की मजबूती से मूल्यांकन लाभ 90 करोड़ डॉलर रहा। मूल्यांकन प्रभाव को हटाने पर जून, 2026 के अंत में बाहरी कर्ज में 15.4 अरब डॉलर के बजाय 16.4 अरब डॉलर की वृद्धि होती।’डॉलर में बड़ा हिस्सा
जून तिमाही में एक साल से अधिक की मूल परिपक्वता अवधि वाला दीर्घकालिक ऋण 624.7 अरब डॉलर रहा। यह मार्च, 2026 के मुकाबले 11.2 अरब डॉलर अधिक है। वहीं, कुल बाहरी कर्ज में एक साल तक की मूल परिपक्वता अवधि वाले अल्पकालिक ऋण की हिस्सेदारी जून, 2026 के अंत में बढ़कर 19.7 प्रतिशत हो गई, जो पिछली तिमाही के अंत में 19.6 प्रतिशत थी।इसी तरह, विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में अल्पकालिक ऋण का अनुपात जून, 2026 के अंत में बढ़कर 23% हो गया, जो मार्च, 2026 के अंत में 21.6% था। आरबीआई के अनुसार, अमेरिकी डॉलर में ऋण भारत के बाह्य ऋण का सबसे बड़ा हिस्सा रहा। जून, 2026 के अंत में इसकी हिस्सेदारी 54.8% थी। इसके बाद भारतीय रुपये में ऋण की हिस्सेदारी 29.8%, येन 6.9%, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) 4.1% और यूरो की हिस्सेदारी 3.5% रही।सरकारी और गैर-सरकारी कर्ज
केंद्रीय बैंक ने कहा, 'जून, 2026 के अंत में सरकार और गैर-सरकारी, दोनों क्षेत्रों का बकाया ऋण मार्च, 2026 के मुकाबले बढ़ गया।' विदेशी ऋण में कर्ज सबसे बड़ा घटक रहा, जिसकी हिस्सेदारी 34.3% थी। इसके बाद मुद्रा एवं जमा (22.2%), व्यापार ऋण एवं अग्रिम (19.1%) और ऋण प्रतिभूतियों (16.5%) का स्थान रहा। मूलधन और ब्याज भुगतान जून, 2026 के अंत में चालू प्राप्तियों का 5.6% रहा। मार्च, 2026 में भी यह अनुपात इतना ही था।
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