4 मुलाकातें-4 सौगातें:केंद्रीय संचार मंत्री, कृषि मंत्री और जनजातीय कार्य मंत्री से मिले सीएम साय

Updated on 01-08-2026
रायपुर, राज्य के आदिवासी और सुदूर के गांवों में डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) योजना 2305 मोबाइल टॉवर से लगेंगे। इससे दूरस्थ, आदिवासी और सीमावर्ती क्षेत्रों में मोबाइल नेटवर्क और हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी। शुक्रवार को दिल्ली में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीच छत्तीसगढ़ में डिजिटल कनेक्टिविटी पर बैठक हुई।

इसमें सिंधिया ने डीबीएन योजना से इन टावरों को शीघ्र मंजूरी का भरोसा दिया। केंद्र ने पहले से 577 अतिरिक्त टॉवरों को मंजूरी दी है। राज्य सरकार ने इनमें से 489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को भूमि संबंधी एनओसी दी है। वहां टॉवर लगने शुरू हो गए हैं। बचे 88 स्थानों के लिए प्रक्रिया तेजी से जारी है।

बेहतर कनेक्टिविटी के फायदे

  • स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार में मदद।
  • ग्रामीण उद्यमियों और स्व-सहायता समूहों की डिजिटल बाजारों तक पहुंच आसान।
  • किसानों को मौसम, कृषि तकनीक और बाजार से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिलेंगी।
  • टेलीमेडिसिन, बैंकिंग, ई-गवर्नेंस और सरकारी सेवाओं का आम आदमी को लाभ।
  • संचार सुविधाओं को हर नागरिक तक पहुंचाना है : मुख्यमंत्री साय मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारा लक्ष्य संचार सुविधाओं का लाभ हर नागरिक तक पहुंचाना है। डिजिटल कनेक्टिविटी से ग्रामीण व वनांचल क्षेत्रों में विकास की गति बढ़ेगी। इससे लोगों की रोजमर्रा की सेवाओं के लिए शहरों पर निर्भरता कम होगी।

    छत्तीसगढ़ में डिजिटल कनेक्टिविटी की लगातार हो रही प्रगति : सिंधिया केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि छत्तीसगढ़ में दूरसंचार और डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में लगातार प्रगति हुई है। केंद्र सरकार का उद्देश्य देश के प्रत्येक नागरिक को विश्वसनीय और आधुनिक डिजिटल नेटवर्क से जोड़ना है।

    अरुणाचल मॉडल पर बस्तर में 10 किमी की परिधि की बसाहटों का एक क्लस्टर

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात कर बस्तर के दुर्गम और आदिवासी क्षेत्रों के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में विशेष प्रावधान की मांग की। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश की तर्ज पर बस्तर में भी 500 मीटर के बजाय 10 किलोमीटर की परिधि में स्थित बसाहटों को एक क्लस्टर माना जाए।

    इससे जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों के अधिक गांव सड़क योजना से जुड़ सकेंगे। केंद्रीय मंत्री चौहान ने आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास, जीरामजी योजना और पीएम आवास योजना पर बेहतर काम हो रहा है। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा भी मौजूद थे।

    बस्तर के 461 गांवों को ग्रिड से जोड़ने मांगे 435 करोड़

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात कर बस्तर संभाग के 7 जिलों के 461 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने के लिए 435 करोड़ की विशेष केंद्रीय सहायता मांगी। उन्होंने धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के तहत विस्तृत प्रस्ताव सौंपा। परियोजना की लागत 973 करोड़ है। केंद्रीय मंत्री ओराम ने कहा कि स्वीकृति प्रक्रिया में धन की कोई बाधा नहीं आने दी जाएगी।

    चावल के शीघ्र उठाव और पर्याप्त रेलवे रैक का आग्रह

    सीएम साय ने केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ से 5 लाख मीट्रिक टन चावल के शीघ्र उठाव तथा हर महीने पर्याप्त रेलवे रैक उपलब्ध कराने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे चावल के परिवहन में तेजी आएगी, गोदामों में नई फसल के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध होगी और किसानों से धान खरीदी की प्रक्रिया और अधिक सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।


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