टाटा ग्रुप की मुश्किल बना 37 साल पुराना मामला, अब टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन ने भी कर दी जांच की मांग
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13-06-2026
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े औद्योगिक घराने टाटा ग्रुप में 37 साल पुराना एक मामला तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला 1989 में शेयरों के ट्रांसफर से जुड़ा है। इस मामले में महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को कुछ दिन पहले शिकायत की गई थी जिसमें आरोप लगाया गया था कि करीब चार दशक पहले नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से टाटा संस लिमिटेड के 833 शेयरों के ट्रांसफर में गड़बड़ी हुई थी। अब टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन विजय सिंह ने भी इसकी स्वतंत्र जांच की मांग की है।ईटी की एक रिपोर्ट के मुताबिक सिंह ने 10 जून को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को पत्र लिखकर कहा कि ऐसी जांच से टाटा ट्रस्ट्स के कामकाज में जनता का भरोसा बहाल करने और उनकी विश्वसनीयता तथा प्रतिष्ठा बनाए रखने में काफी मदद मिलेगी। उन्होंने लिखा, 'सर रतन टाटा ट्रस्ट और नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी के तौर पर, मुझे लगता है कि इन शेयरों के ट्रांसफर की कानूनी वैधता और औचित्य, दोनों की स्वतंत्र जांच का अनुरोध करना मेरा कर्तव्य है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।'हितों का टकराव
नोएल टाटा ने सवालों का जवाब नहीं दिया। चैरिटी कमिश्नर के कार्यालय से तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं मिल सकी। हालांकि टाटा ट्रस्ट्स ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को खारिज कर दिया लेकिन सिंह का कहना है कि ट्रांजैक्शन के बारे में विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। सिंह ने कहा कि इन आरोपों से यह चिंता भी पैदा होती है कि शेयरों का फायदा आखिरकार नवल टाटा के परिवार के सदस्यों को मिला, जिनमें से कुछ अभी भी टाटा ट्रस्ट में अहम पदों पर हैं।उन्होंने कहा कि वह किसी व्यक्ति पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन यह हितों के टकराव का मामला हो सकता है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, नवल टाटा के बेटे हैं। 4 जून को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास एक शिकायत दर्ज कराई गई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि लगभग चार दशक पहले नवाजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से स्वर्गीय नवल एच टाटा को 833 टाटा संस शेयरों के ट्रांसफर में गड़बड़ी हुई थी।क्या है मामला?
वकील कात्यायनी अग्रवाल के जरिए याचिककर्ता सुरेश तुलसीराम पाटिलखेड़े ने आरोप लगाया कि शेयर ट्रांसफर 18 जनवरी 1989 को हुआ था, जो नवल टाटा के ट्रस्टी पद से इस्तीफा देने के एक हफ्ते बाद हुआ। शिकायत में कहा गया है कि यह ट्रांसफर पब्लिक ट्रस्ट से जुड़े नियमों के मुताबिक नहीं था।
टाटा ट्रस्ट ने इन आरोपों का खंडन करते हुए कहा था कि ये आरोप एक दुर्भावनापूर्ण और सुनियोजित अभियान का हिस्सा हैं। इसका मकसद उस संस्था को बदनाम करना है जो 130 से ज्यादा साल से देश में चैरिटी गतिविधियों में लगी हुई है।
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